इतिहास में हमने देखा है कि सत्य और न्याय की राह पर चलने वालों का विरोध सदैव से होता आया है। हर युग में, चाहे वो किसी भी धर्म या किसी भी जाति का क्यों न हो, सच्चाई और हक़ की आवाज़ उठाने वालों का सामना हमेशा विरोधियों से हुआ है। यह इंसानी फितरत है कि वो अपने पुराने तरीकों, रुढ़िवादी सोच और पूर्वाग्रहों से चिपका रहता है, जिससे बदलाव और सच्चाई को अपनाना उनके लिए कठिन हो जाता है। पैगंबरों और रहबरों की जिंदगी का भी यही हाल रहा है। हर पैगंबर को, जिन्हें खुदा ने दुनिया में इंसानियत की रहनुमाई के लिए भेजा, उनका उनकी ही कौम में से विरोध हुआ। यहां तक कि हमारे प्यारे नबी (स.अ.व.) को भी शुरू में उनका मानने वाले बहुत कम लोग थे, और उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी तरह महदी के आने पर भी लोगों का विरोध स्वाभाविक है, क्योंकि दुनिया में बदलाव और सच्चाई को मानना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। हदीस में जो इशारा दिया गया है, वह भी यही दर्शाता है कि महदी के खिलाफ एक जमात या लश्कर तैयार होगा। हमारे नबी (स.अ.व.) ने इस बारे में पहले ही बताया है ताकि उनके मानने वाले इस सच्चाई को जानें और खुदा के ह...
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