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यहूदियों ने क्या गलती की और फिर वही गलती मुसलमान भी करेंगे ऐसा हमारे नबी (ﷺ) ने कहा था

"यहूदियों ने क्या गलती की और फिर वही गलती मुसलमान भी करेंगे ऐसा हमारे नबी (ﷺ) ने कहा था?"

जी हाँ, हदीसों में यह बात आती है कि उम्मत-ए-मुहम्मदिया (ﷺ) भी आगे चलकर यहूदियों और नसाराओं (ईसाइयों) के नक्शे-कदम पर चलेगी।


🌙 हदीस का हवाला:

हज़रत अबू सईद अल-ख़ुदरी (र.अ.) से रिवायत है कि
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

"तुम ज़रूर-ज़रूर अपने से पहले वालों के नक्शे-कदम पर चलोगे, हाथ के हाथ, बाजू के बाजू, यहाँ तक कि अगर वे किसी छिपकली के बिल में घुसे होंगे तो तुम भी उसमें घुसोगे।"

सहाबा ने पूछा: "या रसूलल्लाह! क्या आप से पहले वाले यहूद और नसारा हैं?"
आपने फ़रमाया: "तो और कौन?"

📚 हदीस का स्रोत:

  • सहीह बुखारी: हदीस नं. 7320

  • सहीह मुस्लिम: हदीस नं. 2669


⚠️ यहूदियों की कौन-कौन सी गलतियाँ थीं?

  1. दीन में तहरीफ़ (बदलाव करना):
    – उन्होंने अपनी किताबों में अल्लाह के कलाम को बदल दिया।
    – हुक्मों को छुपाया या बदला।

  2. इल्म होने के बावजूद अमल न करना:
    – उन्हें हक़ मालूम था, मगर वे उस पर चले नहीं।
    – रिआ (दिखावा), घमंड और तंगदिली।

  3. अपने आलिमों और बुज़ुर्गों को अल्लाह जैसा दर्जा देना:
    – उन्हें "हुक्म देने वाले" बना दिया, जैसे वो हलाल-हराम तय करें।

  4. हवस पर चलना, दीन को दुनियावी फायदा के लिए मोड़ना।

  5. तफ़रक़ा और हसद (ईर्ष्या):
    – नबी (ﷺ) से हसद किया और हक़ को मानने से इनकार किया।


🤲 मुसलमानों को चेतावनी क्यों?

क्योंकि उम्मतें अकसर वही ग़लतियाँ दोहराती हैं, जो पिछली उम्मतों ने कीं।
इसलिए नबी (ﷺ) ने बताया ताकि हम:

  • सतर्क रहें,

  • अपने दीन को असल रूप में समझें,

  • किताब और सुन्नत से चिपके रहें,

  • आलिमों को ईमानदारी से फॉलो करें, मगर उन्हें हक़ से ऊपर न रखें।


🧠 नतीजा:

यहूद की गलती थी – इल्म था, मगर अमल नहीं।
नसारा की गलती थी – अमल तो किया, मगर इल्म और सही रास्ता नहीं।

इसलिए मुसलमानों को कहा गया कि:

"तुम्हें इल्म भी लेना है और उस पर अमल भी करना है।"

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